झारखंड में सतत शहरी विकास का रोडमैप तैयार करने की पहल, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर आठ विशेषज्ञ टीमों का गठन

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झारखंड सरकार ने राज्य के शहरों को आधुनिक, सुविधायुक्त और पर्यावरणीय दृष्टि से टिकाऊ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर नगर विकास विभाग ने शहरी विकास का एक समग्र ब्लूप्रिंट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके तहत आठ विशेषज्ञ टीमों का गठन किया गया है जो राज्य के प्रमुख शहरों में आधारभूत संरचना के विकास का खाका तैयार करेंगी।

मुख्यमंत्री की दृष्टि: आधुनिक और टिकाऊ शहर

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि झारखंड को उन्नत शहरी विकास और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल किया जाएगा।
उनकी परिकल्पना के अनुसार शहरों का विकास केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें हरित क्षेत्रों, पर्यावरणीय स्थिरता और नागरिक सुविधाओं का भी समावेश होगा।
नगर विकास एवं आवास मंत्री सुदिव्य कुमार के नेतृत्व में विभाग ने इस दिशा में ठोस पहल शुरू कर दी है।

आठ विशेषज्ञ टीमों का गठन

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद नगर विकास एवं आवास तथा पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार ने आठ विशेषज्ञ टीमों का गठन किया है।
इन टीमों में पथ निर्माण विभाग, जुडको (JUDCO) और नगर विकास विभाग के वरीय अभियंता शामिल हैं।
टीमों का कार्य शहरी क्षेत्रों की मौजूदा संरचना का सर्वेक्षण कर भविष्य के लिए व्यवहार्य और स्थायी समाधान प्रस्तुत करना है।

टीमों का दायित्व और कार्यक्षेत्र

विशेषज्ञ टीमें राज्य के विभिन्न शहरों का दौरा करेंगी और निम्न बिंदुओं पर कार्य करेंगी—

  • सड़क, फ्लाईओवर, अंडरपास, फुटपाथ, हरित पट्टी और यातायात व्यवस्था की मौजूदा स्थिति का अवलोकन और दस्तावेजीकरण।
  • शहरी सौंदर्यीकरण, चौक-चौराहों और गोलंबरों के आधुनिकीकरण की संभावनाओं की जांच।
  • एलिवेटेड रोड, रिंग रोड, बाईपास जैसी नई परियोजनाओं की व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करना।
  • शहरों में यातायात सुगमता और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के उपाय सुझाना।

भविष्य की रूपरेखा और लक्ष्य

प्रधान सचिव सुनील कुमार ने कहा कि किसी शहर की प्रगति का पैमाना उसकी आधारभूत संरचना होती है।उन्होंने स्पष्ट किया, “हमारा लक्ष्य है कि झारखंड के शहर न केवल आधुनिक और आकर्षक बनें, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी टिकाऊ हों।”
इस पहल के माध्यम से झारखंड सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि आने वाले वर्षों में राज्य के शहर न केवल रहने योग्य बल्कि भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप स्मार्ट और सतत बनें।

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