सुप्रीम कोर्ट से झारखंड सरकार को बड़ी राहत, सारंडा जंगल के 31,468 हेक्टेयर क्षेत्र को अभयारण्य घोषित करने की अनुमति

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नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को सारंडा जंगल को अभयारण्य घोषित करने के मामले में महत्वपूर्ण राहत दी है।
अदालत ने राज्य को केवल 31,468.25 हेक्टेयर क्षेत्र को ही अभयारण्य घोषित करने की अनुमति दी, जबकि पहले 57,519.41 हेक्टेयर क्षेत्र को 8 अक्टूबर 2025 तक अभयारण्य घोषित करने का आदेश दिया गया था।
इस फैसले से राज्य सरकार को राहत मिली है, क्योंकि इससे वैध खनन कार्य और रोजगार से जुड़े हित प्रभावित नहीं होंगे।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में क्या हुआ

  • चीफ जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने 8 अक्टूबर को इस मामले पर सुनवाई की।
  • सुनवाई के दौरान अदालत ने —झारखंड सरकार, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल), एमिकस क्यूरी, और अन्य पक्षों की दलीलें सुनीं।
  • अदालत ने कहा कि जिन क्षेत्रों में वैध खनन लीज मौजूद है, उन्हें अभयारण्य की सीमा से बाहर रखा जाए। साथ ही, राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर शपथ पत्र (affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

राज्य सरकार का पक्ष: पर्यावरण और रोजगार में संतुलन

  • राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार को एनजीटी द्वारा तय 31,468 हेक्टेयर क्षेत्र को अभयारण्य घोषित करने में कोई आपत्ति नहीं है।
  • लेकिन जब वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने इस क्षेत्र को बढ़ाकर 57,519 हेक्टेयर कर दिया, तो कई खनन क्षेत्रों पर प्रतिकूल असर पड़ने लगा।

सिब्बल ने अदालत को बताया कि —

  • इतने बड़े क्षेत्र को अभयारण्य घोषित करने से लौह अयस्क (Iron Ore) और अन्य खनिजों की खदानें बंद हो जाएंगी।
  • इससे राज्य की अर्थव्यवस्था, रोजगार, और औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
  • सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन विधिक रूप से संचालित खनन कार्यों को बंद करना व्यावहारिक नहीं है।

सेल (SAIL) का पक्ष: राष्ट्रीय परियोजनाओं पर असर

सेल के अधिवक्ताओं ने कहा कि —

  • सारंडा की खदानों से कंपनी को लौह अयस्क की 50 प्रतिशत जरूरत पूरी होती है।
  • कंपनी 1947 से खनन कार्य कर रही है और रेलवे, रक्षा, और ‘चंद्रयान’ मिशन जैसी राष्ट्रीय परियोजनाओं में स्टील की आपूर्ति करती है।
  • यदि 57 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को अभयारण्य घोषित किया गया, तो उत्पादन और आपूर्ति दोनों बाधित होंगे।

अदालत का फैसला और आगे की प्रक्रिया

  • सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने झारखंड सरकार की मांग स्वीकार कर ली।
  • अब राज्य सरकार 31,468.25 हेक्टेयर क्षेत्र को ही अभयारण्य घोषित कर सकेगी।
  • सुनवाई के दौरान राज्य के मुख्य सचिव भी अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे।

पृष्ठभूमि और महत्व

  • सारंडा जंगल, पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित है और एशिया के सबसे बड़े साल वन क्षेत्रों में से एक है।
  • यह जंगल न केवल जैव विविधता से समृद्ध है, बल्कि लौह अयस्क खनन के लिए भी प्रसिद्ध है।
  • सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अब झारखंड सरकार को पर्यावरण संरक्षण और खनन उद्योग — दोनों के बीच संतुलन साधने का अवसर मिलेगा।
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